माँ तुम बहुत याद आती हो,
मैं उन यादों को,संजोया करती हूँ l
माँ तुम वह एहसास हो,
जिसे मैं हमेशा,
महसूस करती हूँ,
माँ तुम वह आवाज़ हो,
जिसे मैं तनहाइयों में,
सुना करती हूँ l
माँ तुम सरल स्वभाव हो,
जिसमे ढलने का,
हमेशा प्रयास करती हूँ,
तुमने जो रास्ते दिखाए,
उनका ही मैं,
अनुशरण करती हूँ l
जीवन की कठिनाइयों को,
तुम्हारे सहज अंदाज़ से,
समझा करती हूँ,
फिर भी पता नहीं क्यों,
इस जिन्दगी से,
घबराया करती हूँ l
माँ तुम वो "कोहिनूर" हो,
जिसके खोने पर आज,
उसकी चमक, समझ पाती हूँ,
और "माँ" बनने के बाद,
तुम्हारी भावनाओं को,
सजीव देखा करती हूँ l
माँ तुम बहुत याद आती हो,
मैं उन यादों को,
संजोया करती हूँ l
"अल्पना मिश्रा"

बहुत खूब लिखा है आपने।
ReplyDeleteमा वास्तव में कोहीनूर ही होती है
Bahaut bahut aabhar
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