Saturday, June 29, 2013

" आज के नेता "

आज के ये "नेता", किस मिट्टी से बन रहे हैं,
भूलकर  इंसानियत,  इंसानों को  छल रहे हैं l 

वाकई ये नेता कितने,

बेशर्म   हो रहे  हैं,
मिलते ही वोट हमसे,
वह दूर हो रहे हैं l 

मंहगाई की मार से हम,

हलाकान हो रहे हैं,
करुणा  विहीन  नेता,

चुपचाप   सो रहे  हैं l 

क़र्ज़  के  कहर  से,

किसान  जल रहे हैं,
कुर्सी के लोभ में ये,

कुछ कह नहीं रहे हैं l

हर रोज़ बालिकाओं के, बलात्कार हो रहे हैं,
उसमे भी निर्दयी नेता, राजनीति कर रहे हैं l

मंदिर-मस्जिद के नाम पर , विवाद कर रहे हैं,
हम भाइयों के दिल में, नफरत ये भर रहे हैं l

दंगों से सहमे लोग, रातों रात जग रहे हैं,
दंगों की जड़ ये नेता, गुमराह कर रहे हैं l

भगवान् के घर देर है, ये अंधेर कर रहे हैं
इनको सजा मिलेगी, हम सब्र कर रहे हैं l
                           

                     " अल्पना मिश्रा "

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