आज के ये "नेता", किस मिट्टी से बन रहे हैं,
भूलकर इंसानियत, इंसानों को छल रहे हैं l
वाकई ये नेता कितने,
बेशर्म हो रहे हैं,
मिलते ही वोट हमसे,
वह दूर हो रहे हैं l
मंहगाई की मार से हम,
हलाकान हो रहे हैं,
करुणा विहीन नेता,
चुपचाप सो रहे हैं l
क़र्ज़ के कहर से,
किसान जल रहे हैं,
कुर्सी के लोभ में ये,
कुछ कह नहीं रहे हैं l
हर रोज़ बालिकाओं के, बलात्कार हो रहे हैं,
उसमे भी निर्दयी नेता, राजनीति कर रहे हैं l
मंदिर-मस्जिद के नाम पर , विवाद कर रहे हैं,
हम भाइयों के दिल में, नफरत ये भर रहे हैं l
दंगों से सहमे लोग, रातों रात जग रहे हैं,
दंगों की जड़ ये नेता, गुमराह कर रहे हैं l
भगवान् के घर देर है, ये अंधेर कर रहे हैं
इनको सजा मिलेगी, हम सब्र कर रहे हैं l
" अल्पना मिश्रा "
भूलकर इंसानियत, इंसानों को छल रहे हैं l
वाकई ये नेता कितने,
बेशर्म हो रहे हैं,
मिलते ही वोट हमसे,
वह दूर हो रहे हैं l
मंहगाई की मार से हम,
हलाकान हो रहे हैं,
करुणा विहीन नेता,
चुपचाप सो रहे हैं l
क़र्ज़ के कहर से,
किसान जल रहे हैं,
कुर्सी के लोभ में ये,
कुछ कह नहीं रहे हैं l
हर रोज़ बालिकाओं के, बलात्कार हो रहे हैं,
उसमे भी निर्दयी नेता, राजनीति कर रहे हैं l
मंदिर-मस्जिद के नाम पर , विवाद कर रहे हैं,
हम भाइयों के दिल में, नफरत ये भर रहे हैं l
दंगों से सहमे लोग, रातों रात जग रहे हैं,
दंगों की जड़ ये नेता, गुमराह कर रहे हैं l
भगवान् के घर देर है, ये अंधेर कर रहे हैं
इनको सजा मिलेगी, हम सब्र कर रहे हैं l
" अल्पना मिश्रा "

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