Tuesday, January 2, 2024

नूतन वर्ष

सुबह तो वही है, पर मन बहुत विभोर है,

आज से शुरू, नये साल का दौर है l


दिल से जिये कल,

अब आज में आ गये ।

मन में फिर‌ नये नये,

सपने सजा रहे ।

नाच रहा जिस में मेरी चाहतों का मोर‌ है।

सुबह तो वही है, पर मन...


जैसे कोई कठिन राह,

पार कर आया हो।

आगे चल कुदरत ने,

जलवा दिखाया हो।

छाई और गई, हर घटा घनघोर है।

सुबह तो वही है, पर मन...


बहुत जिए जिंदगी,

विधाता तेरा शुक्र है।

तेरी कृपा से भगवन, 

हर जीव बेफिक्र है।

जीने की चाह बहुत, देह बेशक कमजोर है।

सुबह तो वही है , पर मन ......


आदर बड़ों को ,

छोटों को प्यार है 

नूतन वर्ष की,आज से बहार है।

उम्मीदों का सुखद अहसास,अब फैला चहुँ ओर है।

सुबह तो वही  है , पर मन बहुत विभोर है।

आज से शुरू, नये साल का दौर है ...


"अल्पना बाजपेई मिश्रा" अल्पी