Wednesday, July 10, 2013

" जीने का सलीका "

मुस्कराते चेहरे से,
हर दर्द छुपाना है,
सब कुछ बोलकर भी,
कुछ नहीं बताना है l 

कभी न रूठो किसी से,
पर सबको मनाना है,
नेकी करें हमेशा ,
पर इसको न जताना है l 

मन शांत हो हमेशा ,
यही  दिल में बसाना है,
जीने के सलीके का ,
यही राज पुराना है  l

........ " अल्पना मिश्रा "

Sunday, July 7, 2013

" फेस बुक "






फेस बुक, स्वीकार करो तुम,
हृदय से धन्यवाद हमारा,
तुम्हारे कारण ही हाथ में,
खोई कलम, आई है दुबारा l

पहले मिली नहीं थी तुमसे,
नाम सुना था बहुत तुम्हारा,
कुछ लोगों से सुनी बुराई,
मिलने को न मन था गवारा l

इन्टरनेट लगा जब घर पर,
अन्तर्द्वन्द्व में, आई. डी. बनाई,
डरी-डराई थी मैं तुमसे,
मिलने पर, जानी अच्छाई l

मिलवाती रहती अपनों से,
देश-विदेश की, खबर बताती,
विचार दिखाती अच्छे-अच्छे,
देखे बिन तुम्हें, चैन न पाती l

अब जाना दो पहलू तुम्हारे,
कुछ अच्छाई, कुछ है बुराई,
मुझे दिखी अच्छाई तुममे,
इसलिए तुम्हें, देती हूँ बधाई

                  " अल्पना मिश्रा "

Friday, July 5, 2013

" त्रासदी में राजनीति "


देश के जिम्मेदार नेताओ,
अब तो करो शर्म,
उत्तराखंड की तबाही पर,
तू-तू , मैं-मैं करो बंद l

अगर कुछ इंसानियत है तो,
वहां फंसे, लोगों को बचाओ ,

अपना फ़र्ज़ निभाकर,
कुछ दया-धर्म तो दिखलाओ l

उन खामोश वादियों में,
लगा है लाशों का अम्बार,
उनकी आत्मा-शांति के लिए,
करवाएं उनके दाह-संस्कार l

बाग़डोर जिनको दी देश की,
वही कर रहे बंटाढार,
भ्रष्टाचार चरम सीमा पर,
जनता बेबस और लाचार l

कोलाहल करते संसद में,
चप्पल-कुर्सी से करते वार,
क्या-क्या दिखा रहे दुनियां को,
कहाँ गए सारे संस्कार l

याद करो उन नेताओं को,
जिनसे देश हुआ आज़ाद,
गाँधी, तिलक, आज़ाद, भगत सिंह,
उनकी कुर्बानी न हो बर्बाद l

जनता जाग गई है देश की,
अब न सहेगी अत्याचार,
सुधर जाओ नेताओं अब तुम,
बनो प्रगति के सूत्रधार ll
        
            
             " अल्पना मिश्रा "