बेटी तुम हो बहुत महान ,
करती हूँ मैं तुझे सलाम |
तुम हो चिड़िया मेरे घर की,
फुदकती रहती कोना कोना,
तुमसे दीपित आँगन घर का,
तुम हो प्यारी मेरी सोना |
तुमको जब ना पाती घर में,
लगता है घर सूना सूना ,
यही सोच विह्वल कर जाती,
एक दिन तुमको है उड़ जाना |
जब भी कोई मुस्किल आती,
रखती हो तुम सबका ध्यान ,
भाई, माता और पिता का,
तुम करती सबका सम्मान |
तुम हो मेरे घर की आन,
रखती हूँ मैं इसका मान ,
कोशिश रहती यही हमेशा,
नहीं तुम्हारा हो अपमान |
बेटी इस समाज में तुमको,
क्या-क्या करना पड़ता सहन,
सम्मत जीवन जीने हेतु,
करने पड़ते कितने जतन |
शिक्षा और स्वावलंबन से,
तोड़ दो इस समाज का वहम,
"दहेज़-दानव" जो घूम रहा है,
उसको करना हैं अब ख़तम |
बेटी तुम हो बहुत महान ,
करती हूँ मैं तुझे सलाम |
..........." अल्पना मिश्रा "
करती हूँ मैं तुझे सलाम |
तुम हो चिड़िया मेरे घर की,
फुदकती रहती कोना कोना,
तुमसे दीपित आँगन घर का,
तुम हो प्यारी मेरी सोना |
तुमको जब ना पाती घर में,
लगता है घर सूना सूना ,
यही सोच विह्वल कर जाती,
एक दिन तुमको है उड़ जाना |
जब भी कोई मुस्किल आती,
रखती हो तुम सबका ध्यान ,
भाई, माता और पिता का,
तुम करती सबका सम्मान |
तुम हो मेरे घर की आन,
रखती हूँ मैं इसका मान ,
कोशिश रहती यही हमेशा,
नहीं तुम्हारा हो अपमान |
बेटी इस समाज में तुमको,
क्या-क्या करना पड़ता सहन,
सम्मत जीवन जीने हेतु,
करने पड़ते कितने जतन |
शिक्षा और स्वावलंबन से,
तोड़ दो इस समाज का वहम,
"दहेज़-दानव" जो घूम रहा है,
उसको करना हैं अब ख़तम |
बेटी तुम हो बहुत महान ,
करती हूँ मैं तुझे सलाम |
..........." अल्पना मिश्रा "

