Saturday, June 29, 2013

" वह कली जो, खिलने से पूर्व ही मुरझा गयी "


वह कली जो,
खिलने से पूर्व ही
मुरझा गयी l


अपने होठों से,
कुछ कहना 
चाह रही थी,
पर पता नहीं क्यों 
कह नहीं पा रही थी l
वह कली जो,
खिलने से पूर्व ही
मुरझा गयी l

उसका चेहरा
बुझा हुआ था,
जिसको मुस्करा कर,
छिपाने का प्रयास 
कर रही थी l
वह कली जो,
खिलने से पूर्व ही
मुरझा गयी l

शायद "कली" ने तो
"भँवरे" को मोह लिया था,
पर तेज़ हवा के झोंकों से
काँटों ने उसको
गोद दिया था l
वह कली जो,
खिलने से पूर्व ही
मुरझा गयी ll


 "अल्पना मिश्रा"


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