वह कली जो,
खिलने से पूर्व ही
मुरझा गयी l
अपने होठों से,
चाह रही थी,
पर पता नहीं क्यों
कह नहीं पा रही थी l
वह कली जो,
खिलने से पूर्व ही
मुरझा गयी l
उसका चेहरा
बुझा हुआ था,
जिसको मुस्करा कर,
छिपाने का प्रयास
कर रही थी l
वह कली जो,
खिलने से पूर्व ही
मुरझा गयी l
शायद "कली" ने तो
"भँवरे" को मोह लिया था,
पर तेज़ हवा के झोंकों से
काँटों ने उसको
गोद दिया था l
वह कली जो,
खिलने से पूर्व ही
मुरझा गयी ll
"अल्पना मिश्रा"

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