Saturday, June 29, 2013

" ये जिन्दगी "





ये जिन्दगी,
हसीन है जितनी,
उतना ही,
उसमे गम है |
इसमें हम,
हँस लें,

जितना,
उतना ही कम है |

हम इसमें,
जितना उलझे,
उतनी ही,
आँखें नम है |

जाएँ शरण में,
प्रभु की,
इस बात में,
ही दम है |

इसलिए,
जिन्दगी देने वाले से,
प्यार कर |
जो सत्य है,
उसे ही,
स्वीकार कर |
      
      "अल्पना मिश्रा"

No comments:

Post a Comment