Saturday, October 21, 2017

श्यामली कोकिला

कोयलिया तुम हो , काली काली l
          जैसे ‘श्याम रंग’ में , रंगी श्यामली ll

भोर भये आँगन में , जब टेर लगाती l
           मेरे मन को , तुम बहुत लुभाती ll
फुदक -फुदक कर , डाली डाली पर l
          ‘साँवरे’ की तरह , तुम बहुत सताती ll

कूक -कूक कर , मुझे बताती l
          मैं हूँ तेरे , ‘कान्हा’ की मतवाली ll
कूक सुन ‘अल्पी’ , व्याकुल हो जाती l
          मानो बज उठी  , मेरे “प्रीतम” की बांसुरी ll

कोयलिया तुम हो , काली काली l
          जैसे ‘श्याम रंग’ में , रंगी श्यामली ll


                                “अल्पना मिश्रा”

4 comments:

  1. कोयलिया से नाता
    हमको मन भाता।।।
    बहुत खूब लिखतीं हैं धन्यवाद।

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  2. Koyaliya me shyamli ki anubhuti atyant adbhut aur Manmohan hai.🙏🙏....shraddha

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  3. Superb kya bat he didi very nice

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