Thursday, October 24, 2013

"मेरी बेटी"

बेटी तुम हो बहुत महान ,
करती हूँ मैं तुझे सलाम |

तुम हो चिड़िया मेरे घर की,
फुदकती रहती कोना कोना,
तुमसे दीपित आँगन घर का,
तुम हो प्यारी मेरी सोना |

तुमको जब ना पाती घर में,
लगता है घर सूना सूना ,
यही सोच विह्वल कर जाती,
एक दिन तुमको है उड़ जाना |

जब भी कोई मुस्किल आती,
रखती हो तुम सबका ध्यान ,
भाई, माता और पिता का,
तुम करती सबका सम्मान |

तुम हो मेरे घर की आन,
रखती हूँ मैं इसका मान ,
कोशिश रहती यही हमेशा,
नहीं तुम्हारा हो अपमान |

बेटी इस समाज में तुमको,
क्या-क्या करना पड़ता सहन,
सम्मत जीवन जीने हेतु,
करने पड़ते कितने जतन |

शिक्षा और स्वावलंबन से,
तोड़ दो इस समाज का वहम,
"दहेज़-दानव" जो घूम रहा है,
उसको करना हैं अब ख़तम |

बेटी तुम हो बहुत महान ,
करती हूँ मैं तुझे सलाम |
..........." अल्पना मिश्रा "

1 comment:

  1. बेटीयों का महिमामंडित होना स्वस्थ समाज का लक्षण है
    हमने सोचा था हमारी एक मात्र बहन के विवाह के बाद बिदाई में हमारी सांसे अवश्य रूक जाएँगी
    ऐसी रचनाएँ समाज के लिए,वरदान हैं
    लिखे हुए शब्द का हमारे लिए अधिक महत्व है,बस।धन्यवाद

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