
फेस बुक, स्वीकार करो तुम,
हृदय से धन्यवाद हमारा,
तुम्हारे कारण ही हाथ में,
खोई कलम, आई है दुबारा l
पहले मिली नहीं थी तुमसे,
नाम सुना था बहुत तुम्हारा,
कुछ लोगों से सुनी बुराई,
मिलने को न मन था गवारा l
इन्टरनेट लगा जब घर पर,
अन्तर्द्वन्द्व में, आई. डी. बनाई,
डरी-डराई थी मैं तुमसे,
मिलने पर, जानी अच्छाई l
मिलवाती रहती अपनों से,
देश-विदेश की, खबर बताती,
विचार दिखाती अच्छे-अच्छे,
देखे बिन तुम्हें, चैन न पाती l
अब जाना दो पहलू तुम्हारे,
कुछ अच्छाई, कुछ है बुराई,
मुझे दिखी अच्छाई तुममे,
इसलिए तुम्हें, देती हूँ बधाई
" अल्पना मिश्रा "
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